दयाल साव: विषम परिस्थितियों में उभरते कलाकार

दयाल साव, गाँव नापो खुर्द, बड़कागाँव के निवासी है | बड़कागाँव एक ऐसा क्षेत्र है, जहाँ ज्यादातर लोग खेती-मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं | बड़कागाँव खनिज सम्पदा से परिपूर्ण है और यहाँ के लोग मेहनतकस हैं| इसके विपरीत, आज भी यहाँ अवसर एवं शिक्षा का बेहद आभाव है | बड़कागाँव में आपको थोड़ी बहुत सुविधा मिल भी जाये, किन्तु नापो एक दूरस्थ गाँव है |जहाँ लोगों को आये दिन विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है| जहाँ समाज में लोग, किसी तरह जीवन यापन के लिए काम-धंधे की ओर अपना रुख रखते हैं, वहां कोई कलाकार बनने की बात भी नहीं करता |

दयाल साव ने इन विषम परिस्थितियों में आर्ट के क्षेत्र में आगे बढ़, लोगों के सामने सफलता का एक पैमाना रख दिया है | अभी वे केंद्रीय विद्यालय रांची में आर्ट शिक्षक हैं | बच्चों को चित्रकारी सिखातें हैं | साथ ही कई वर्कशॉप एवं सेमिनार का आयोजन भी किया करते हैं | उनकी कला यहाँ तक सिमित नहीं, वे बड़कागाँव के विकाश के लिए एक अच्छी सोच रखते हैं | और अपने कला के द्वारा लोगों को हमेशा जागरुक करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं |

(चित्र में: बस के बढ़ते किराये को सोशल मीडिया पे दर्शाने के लिए दयाल साव द्वारा बनाया गया कार्टून)

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